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सभी 30 तिथियां — महत्व, व्रत नियम और तिथि संदर्भ

चंद्र मास में शुक्ल और कृष्ण पक्ष मिलाकर 30 तिथियां होती हैं। प्रत्येक तिथि का अपना देवता, व्रत अनुशासन, शुभ-अशुभ संकेत और व्यवहारिक उपयोग होता है। यही कारण है कि हिंदू पंचांग में केवल अंग्रेजी तारीख देखना पर्याप्त नहीं माना जाता; सही तिथि, उसका पक्ष और स्थानीय सूर्योदय-संदर्भ समझना भी उतना ही जरूरी होता है।

इस हब में आप सभी तिथियों का परिचय, उनकी व्रत-विधि, महत्व, वर्षवार तिथि-सूची और संबंधित संदर्भ पेज तक पहुंच सकते हैं। यदि आप व्रत, पूजा, दान, गृह-कार्य, पारिवारिक अनुष्ठान या किसी शुभ आरंभ की योजना बना रहे हैं, तो पहले तिथि की प्रकृति समझना सबसे उपयोगी कदम होता है।

इस हब का उपयोग कैसे करें

  • पहले तिथि के मुख्य परिचय पेज पर जाएं ताकि देवता, महत्व, व्रत-नियम और शुभ कार्य समझ सकें।
  • फिर उसी तिथि की व्रत-विधि और महत्व पेज खोलकर पालन, पारणा और उपासना के बारीक बिंदु देखें।
  • यदि आपको तारीख चाहिए तो वर्षवार तिथि पेज उपयोग करें, जहां शहर-पंचांग संदर्भ के साथ तालिका दी जाती है।
  • अंतिम पालन से पहले अपने शहर का पंचांग अवश्य देखें, क्योंकि तिथि सूर्योदय के आसपास बदल सकती है।

तिथि क्यों महत्वपूर्ण है

तिथि हिंदू जीवन में केवल कैलेंडर की इकाई नहीं, बल्कि निर्णय की लय है। व्रत कब रखा जाए, कौन सा पाठ किस दिन अधिक उपयुक्त है, दान कब करना चाहिए, और किन दिनों में शुरुआत को रोककर केवल तैयारी करनी चाहिए, यह समझ तिथि से ही निकलती है। एक ही तारीख पर दो शहरों में अलग तिथि चल सकती है, इसलिए तिथि का उपयोग हमेशा खगोलीय और स्थानीय दोनों स्तरों पर किया जाता है।

शुक्ल पक्ष की तिथियां सामान्यतः वृद्धि, उजास और आरंभ की दिशा दिखाती हैं, जबकि कृष्ण पक्ष की तिथियां समीक्षा, संयम, त्याग और अंतर्मुख साधना का संकेत देती हैं। इसी भिन्नता के कारण प्रतिपदा, एकादशी, चतुर्दशी, पूर्णिमा और अमावस्या जैसी तिथियों का व्यवहारिक उपयोग भी एक-दूसरे से अलग होता है।

तिथि सूची

तिथिदेवतामुख्य उपयोगलिंक
शुक्ल प्रतिपदाअग्नियोजना और अनुशासित आरंभशुक्ल प्रतिपदा देखें
शुक्ल द्वितीयाब्रह्मादान, सेवा और विनम्र सहयोगशुक्ल द्वितीया देखें
शुक्ल तृतीयागौरीपरिवारिक पूजा और सामूहिक श्रद्धाशुक्ल तृतीया देखें
शुक्ल चतुर्थीगणेशस्वाध्याय और आत्मचिंतनशुक्ल चतुर्थी देखें
शुक्ल पंचमीनाग देवताप्रार्थना, जप और भाव-संतुलनशुक्ल पंचमी देखें
शुक्ल षष्ठीकार्तिकेययोजना और अनुशासित आरंभशुक्ल षष्ठी देखें
शुक्ल सप्तमीसूर्यदान, सेवा और विनम्र सहयोगशुक्ल सप्तमी देखें
शुक्ल अष्टमीदुर्गापरिवारिक पूजा और सामूहिक श्रद्धाशुक्ल अष्टमी देखें
शुक्ल नवमीमां दुर्गास्वाध्याय और आत्मचिंतनशुक्ल नवमी देखें
शुक्ल दशमीयमप्रार्थना, जप और भाव-संतुलनशुक्ल दशमी देखें
शुक्ल एकादशीविष्णुयोजना और अनुशासित आरंभशुक्ल एकादशी देखें
शुक्ल द्वादशीवामनदान, सेवा और विनम्र सहयोगशुक्ल द्वादशी देखें
शुक्ल त्रयोदशीकामदेवपरिवारिक पूजा और सामूहिक श्रद्धाशुक्ल त्रयोदशी देखें
शुक्ल चतुर्दशीशिवस्वाध्याय और आत्मचिंतनशुक्ल चतुर्दशी देखें
पूर्णिमाचंद्रप्रार्थना, जप और भाव-संतुलनपूर्णिमा देखें
कृष्ण प्रतिपदाअग्नियोजना और अनुशासित आरंभकृष्ण प्रतिपदा देखें
कृष्ण द्वितीयाब्रह्मादान, सेवा और विनम्र सहयोगकृष्ण द्वितीया देखें
कृष्ण तृतीयागौरीपरिवारिक पूजा और सामूहिक श्रद्धाकृष्ण तृतीया देखें
कृष्ण चतुर्थीगणेशस्वाध्याय और आत्मचिंतनकृष्ण चतुर्थी देखें
कृष्ण पंचमीनाग देवताप्रार्थना, जप और भाव-संतुलनकृष्ण पंचमी देखें
कृष्ण षष्ठीकार्तिकेययोजना और अनुशासित आरंभकृष्ण षष्ठी देखें
कृष्ण सप्तमीसूर्यदान, सेवा और विनम्र सहयोगकृष्ण सप्तमी देखें
कृष्ण अष्टमीदुर्गापरिवारिक पूजा और सामूहिक श्रद्धाकृष्ण अष्टमी देखें
कृष्ण नवमीमां दुर्गास्वाध्याय और आत्मचिंतनकृष्ण नवमी देखें
कृष्ण दशमीयमप्रार्थना, जप और भाव-संतुलनकृष्ण दशमी देखें
कृष्ण एकादशीविष्णुयोजना और अनुशासित आरंभकृष्ण एकादशी देखें
कृष्ण द्वादशीवामनदान, सेवा और विनम्र सहयोगकृष्ण द्वादशी देखें
कृष्ण त्रयोदशीकामदेवपरिवारिक पूजा और सामूहिक श्रद्धाकृष्ण त्रयोदशी देखें
कृष्ण चतुर्दशीशिवस्वाध्याय और आत्मचिंतनकृष्ण चतुर्दशी देखें
अमावस्यापितृ देवप्रार्थना, जप और भाव-संतुलनअमावस्या देखें

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

  • एक चंद्र मास में कितनी तिथियां होती हैं?

    शुक्ल और कृष्ण पक्ष मिलाकर कुल 30 तिथियां होती हैं।

  • तिथि शहर के अनुसार क्यों बदल सकती है?

    तिथि का पालन स्थानीय सूर्योदय, चंद्र गति और तिथि-परिवर्तन समय के कारण शहर अनुसार बदल सकता है।

  • तिथि देखते समय सबसे पहले क्या समझें?

    तिथि का नाम, पक्ष, व्रत-नियम, संबंधित देवता और शहर-पंचांग की अंतिम समय-सीमा सबसे पहले समझनी चाहिए।

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